इसे यह भी कहते हैं
माइंडफुल टचिंग (Mindful touching), गैर-कामोन्माद/गैर-उत्तेजना केंद्रित स्पर्श (Non-orgasm/non-arousal focused touch)
परिभाषा
सेंसेट फ़ोकस एक तकनीक है, जिसका उपयोग सेक्स के संबंध में पार्टनरों के बीच अंतरंगता और संवाद को बेहतर बनाने, यौन प्रदर्शन चिंता को कम करने, और उन गहराई से जमे, लक्ष्य-केंद्रित यौन पैटर्नों से दूर हटने के लिए किया जाता है, जो शायद किसी युगल के लिए उपयोगी न हों। डॉ. William H. Masters और Virginia E. Johnson द्वारा 1960 के दशक में विकसित इस तकनीक में स्पर्श के अभ्यासों की एक शृंखला होती है, जिसे युगल एक क्रम में पूरा करता है। इस अभ्यास का एक प्रमुख उद्देश्य यह है कि पार्टनर आपसी स्पर्श से जुड़ी अपनी अपेक्षाओं और आकलनों को छोड़ दें, और इसके बजाय केवल स्पर्श के संवेदी पहलुओं, जैसे तापमान, बनावट और दबाव, पर ध्यान केंद्रित करें। सेंसेट फ़ोकस के पीछे विचार यह है कि इससे युगल तनावमुक्त होकर कामुक स्पर्श के अनुभव के प्रति सजग रह पाता है, और इस पूर्वधारणा के बोझ से मुक्त रहता है कि क्या “होना चाहिए”। सेंसेट फ़ोकस को माइंडफ़ुल टचिंग (सजग स्पर्श), या ऐसा स्पर्श भी कहा गया है जो ऑर्गेज़्म/उत्तेजना पर केंद्रित नहीं होता।
सेक्स थेरेपिस्ट उन युगलों को सेंसेट फ़ोकस की सलाह दे सकते हैं, जो शारीरिक छवि (बॉडी इमेज), उत्तेजना, इच्छा, ऑर्गेज़्म, शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करना चाहते हैं। हालाँकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि ये समस्याएँ किसी अंतर्निहित चिकित्सीय स्थिति के कारण भी हो सकती हैं, इसलिए शुरू करने से पहले यौन विकार के अन्य संभावित कारणों को ख़ारिज करने के लिए शारीरिक जाँच करवा लेना एक अच्छा विचार है।
नैदानिक संदर्भ
सेंसेट फ़ोकस एक तकनीक है, जिसकी सलाह सेक्स थेरेपिस्ट अक्सर उन युगलों को देते हैं जो शारीरिक छवि, उत्तेजना, इच्छा, ऑर्गेज़्म, शीघ्रपतन और इरेक्टाइल डिसफंक्शन से जुड़ी समस्याओं का समाधान कर रहे हैं। इसका उपयोग पार्टनरों के बीच अंतरंगता और संवाद को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है। इस तकनीक में संरचित स्पर्श अभ्यासों की एक शृंखला शामिल होती है, जो आमतौर पर जननांगों को छोड़कर अन्य अंगों के स्पर्श से शुरू होकर धीरे-धीरे जननांग और आपसी स्पर्श तक आगे बढ़ती है। इसका प्राथमिक लक्ष्य प्रदर्शन चिंता को कम करना और ध्यान को लक्ष्य-केंद्रित यौन पैटर्नों से हटाकर स्पर्श के संवेदी पहलुओं पर ले जाना है, जिससे सजगता और कामुक जागरूकता को बढ़ावा मिलता है। यद्यपि यह विभिन्न यौन समस्याओं के लिए प्रभावी है, सेंसेट फ़ोकस थेरेपी शुरू करने से पहले अंतर्निहित चिकित्सीय स्थितियों को ख़ारिज करना महत्वपूर्ण है। सर्जरी के बाद डीप एंडोमेट्रियोसिस वाली महिलाओं में इससे यौन कार्य में सुधार दिखाया गया है।
