Skip to main content

स्थिर जाल के साथ संशोधित मैलिएबल कृत्रिम अंग: Ghattas तकनीक के लिए केस श्रृंखला

लेखक:
पत्रिका
Asian Journal of Andrology
वर्ष

संक्षिप्त सारांश

यह अध्ययन Ghattas तकनीक का परिचय देता है — बड़े कॉर्पोरल बॉडी वाले रोगियों के लिए कृत्रिम अंग का व्यास बढ़ाने के लिए 13-mm मैलिएबल कृत्रिम अंग के चारों ओर पॉलीप्रोपाइलीन जाल का उपयोग। इस विधि से IIEF-5 और EDITS स्कोर में महत्वपूर्ण सुधार हुआ। चयनित मामलों में Rigicon मैलिएबल कृत्रिम अंग का उपयोग किया गया।

सारांश

उद्देश्य:

13 mm से अधिक व्यास की आवश्यकता वाले रोगियों में जाल-स्थिर मैलिएबल लिंग कृत्रिम अंगों का उपयोग करके Ghattas तकनीक की प्रभावशीलता और सुरक्षा का मूल्यांकन करना।

मुख्य निष्कर्ष:

Ghattas तकनीक के परिणामस्वरूप स्तंभन कार्य में महत्वपूर्ण सुधार हुआ, जिसमें औसत IIEF-5 स्कोर 8.3 से बढ़कर 24.6 (P < 0.001) हो गया, और उच्च औसत EDITS स्कोर 94.9 था। कोई प्रमुख जटिलताएँ नहीं हुईं, और तकनीक ने बड़े कॉर्पोरल बॉडी वाले रोगियों के लिए एक व्यवहार्य समाधान प्रदान किया।

निष्कर्ष:

Ghattas तकनीक मानक सीमाओं से परे कृत्रिम अंग व्यास को सुरक्षित रूप से बढ़ाती है, जो चयनित स्तंभन दोष रोगियों के लिए एक आशाजनक शल्य चिकित्सा विकल्प प्रदान करती है। दीर्घकालिक अध्ययन आवश्यक हैं।

नैदानिक प्रासंगिकता:

यह तकनीक बड़े कॉर्पोरल आयामों वाले रोगियों के लिए अनुकूलित समाधान सक्षम करके मैलिएबल लिंग कृत्रिम अंगों में एक प्रमुख सीमा को संबोधित करती है, जिससे संतुष्टि में सुधार होता है और जटिलताएँ कम होती हैं।

कीवर्ड

स्तंभन दोष लिंग कृत्रिम अंग मैलिएबल प्रत्यारोपण Ghattas तकनीक जाल आवरण Rigicon Rigi10 IIEF-5 EDITS

This publication is available through the external link above. See the abstract for a summary of the research.